साल का पहला और 150 साल बाद दुर्लभ चंद्र ग्रहण; 50 साल बाद लोगों को ये संयोग देखने को मिला

वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण 31 जनवरी को दिखाई दे रहा है। यह ग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि यह ब्लू मून और सुपर मून के साथ दिख रहा है। इस बार का चंद्रग्रहण तीन रंगों में नजर आ रहा है। खगोल शास्त्रियों के मुताबिक ऐसी घटना 150 सालों में पहली बार हो रही है। चंद्रग्रहण शाम 4.21 बजे शुरू हुआ और रात 9.38 बजे चंद्रग्रहण समाप्त होगा, जब चांद धरती की छाया से निकल जाएगा।भारतीय ज्योर्तिविज्ञान परिषद के मुताबिक,पृथ्वी चंद्र ग्रहण के प्रभाव वाले क्षेत्र में 04 बजकर 22 मिनट में दाखिल होगी। दरअसल, इस दौरान पृथ्वी की एक आंशिक बाहरी छाया चंद्रमा पर पड़ेगी। आंशिक चंद्रग्रहण शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा। पूर्ण चंद्रग्रहण शाम 06:22 बजे से लेकर 07:38 बजे तक चलेगा। आंशिक चंद्रगहण 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा। चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह रात 9 बजकर 39 मिनट पर बाहर निकलेगा।

आज साल 2018 का पहला चंद्र ग्रहण हुआ। आम दिनों की तुलना में चांद आज 14 फिसदी बड़ा नजर आया। शास्त्रों में ग्रहण के बाद दान देने के बारे में बताया गया है। कहा जाता है ग्रहण के बाद दान करने से ग्रहण का बुरा असर नहीं पड़ता है।  साल 2018 में ऐसा पहली बार हो रहा है जब एक ही दिन माघ पूर्णिमा, चंद्रग्रहण, सुपर मून और ब्लू मून का संयोग बना। चंद्र ग्रहण के दिन अशुभ काल को सूतक काल कहा जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किए जाते हैं। खगोल जानकारों के मुताबिक चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ घटना होती है। शुरुआती चंद्र उदय को आसानी से देख पाना बहुत मुश्किल होता है। चंद्र ग्रहण देखने के लिए वैज्ञानिक बहुत सुक्ष्म दूरबीनों का प्रयोग करते हैं। इस बार चंद्र ग्रहण सुपर ब्लू ब्लड मून होगा। इससे पहले ऐसा 1866 में ऐसा हुआ था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक इस महीने के आखिर में एक बार फिर सुपर ब्लू मून दिखाई दे सकता है।पूरे उत्तरी अमेरिका, प्रशांत क्षेत्र से लेकर पूर्वी एशिया में इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण दिखा। अमेरिका, अलास्का, हवाई द्वीप के लोग 31 जनवरी को सूर्योदय से पहले चंद्र ग्रहण देख पाएंगे जबकि मध्य पूर्व के देश समेत एशिया, रूस के पूर्वी भाग, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में सुपर ब्लू ब्लडमून 31 जनवरी को सुबह चंद्रोदय के दौरान लोग देख पाए। दिसंबर में हुई पूर्णमासी के चांद को कोल्ड मून कहा जाता है और 2017 में यह पहला सुपरमून था जिसका लोगों ने दीदार किया। चांद का आकार सामान्य से सात फीसदी बड़ा लग रहा था और यह सामान्य से 15 फीसदी ज्यादा चकमीला था।

ग्रहण से धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। वाराणसी के मशहूर दशाश्वमेध घाट पर ग्रहण से पहले हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। आरती करती महिलाएं।

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